उत्तराखण्ड सल्यूट अवार्ड से नवाजे गए डॉ. हेमंत अत्री

उत्तराखण्ड सल्यूट अवार्ड से नवाजे गए डॉ. हेमंत अत्री
dr hemant atri faridabad

-देश के टॉप दस में समाजसेवियों में चुने गए डॉ. हेमंत
Yashvi Goyal
फरीदाबाद। देहरादून में दून एनिमल फाउंडेशन की ओर से आयोजित देश के टॉप दस समाजसेवी सम्मानित समारोह में शहर के समाजसेवी डॉ. हेमंत अत्री को उत्तराखण्ड सल्यूूट अवार्ड से नवाजा गया। इस कार्यक्रम में देश भर से हजारों समाजसेवियों ने भाग लिया था। यह अवार्ड उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, हिमालय के चेरयमैन, मिशन मोदी के अध्यक्ष सुनिल उनियाल ने दिया। डॉ. हेमंत अत्री को यह अवार्ड रक्तदान, देहदान मुहिम एवं महिलाओं के उत्थान के लिए सिलाई सेंटर, जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए दिया गया है।
गौरतलब है कि डॉ. हेमंत अत्री सन् 2007 से रक्त दान की मुहिम चला रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ार्ई के दौरान जब एक मरीज को खून न मिलने के कारण जान गंवाते देखा तो उन्होंने ठान लिया कि अब किसी की जान खून की कमी के कारण नहीं जाएगी। डॉ. हेमंत अत्री ने रक्तदान की मुहिम सन् 2007 में गुजरात से आरंभ की थी। उस दौरान उन्होंने स्टूडेंट लेबल पर ब्लड डोनर एसोसिएशन बनाई थी। जिसमें छात्रों को जोड़ा गया। पढ़ाई के दौरान भी उन्हें जैसे ही पता चलता था कि किसी मरीज को रक्त की जरूरत पड़ी है, तो वह लेक्चर खत्म कर रक्तदान करने पहुंच जाते थे। र्फोटिस अस्पताल में प्रेक्टिस कर रहे डॉ. अत्री सर्जरी के दौरान किसी मरीज को रक्त की जरूरत पडने पर स्वयं रक्तदान करने से पीछे नहीं हटते हैं। वह अब 49 बार रक्तदान कर चुके हैं।

देह दान के लिए करते हैं जागरूक
डॉ. हेमंत अत्री ने बताया कि रक्तदान की सफल मुहिम को देखते हुए उन्होंने देह दान के प्रति लोगों को जागरूक करना शुरू किया। शुरूआत में उन्होंने अपने और सगे-संबंधियों को देह दान करने के लिए फार्म भरवाए। आज वह 900 लोगों को देह दान के लिए फार्म भरवा चुके हैं। डॉ. हेमंत अत्री का कहना है कि जीते जी रक्तदान, मरने के बाद देहदान ही मेरा नारा है।

महिलाओं एवं बच्चों के लिए भी करते हैं कार्य
युवाअवस्था से ही समाज के लिए काम कर रहे डॉ हेमंत अत्री आज अपने पेशे के अलावा समाजसेवा को अपनी दूसरी नौकरी मानते हैं और इन मुहिम के अलावा वह मीठापुर स्थित जज्बा फाउंडेशन में जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाते हैं। महिलाओं को उनके पैरों पर खड़ा करने के लिए संस्था के साथ मिलकर सिलाई सेंटर चला रहे हैं। वहीं स्लम एरिया में जाकर बच्चों को कपड़े व अन्य वस्तुएं बांटते हैं। उन्होंने बताया कि तिगांव में भी सिलाई सेंटर खोला जा रहा है। जहां गांव की महिलाएं सिलाई-कढाई सिखकर स्वावलंबी बनेंगी।

फोटो- उत्तराखण्ड सल्यूूट अवार्ड लेते हुए डॉ. हेमंत अत्री।

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