अदालत के आदेश के बाद कहीं जान से न खेलने लगे लोग 

अदालत के आदेश के बाद कहीं जान से न खेलने लगे लोग 
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Todaybhaskar.com
DeSK| देश के लिए सड़क दुर्घटना एक सर दर्द बनता जा रहा है| उसके वाबजूद केरला हाईकोर्ट का यह फैसला कहीं वाहन चालकों को और लापरवाह न बना दें| बताते चले कि  केरला हाईकोर्ट  ने कहा कि गाड़ी चलाते समय फोन पर बात करना तब तक कोई अपराध नहीं है जब तक इसे लेकर कोई कानून नहीं बनाया जाता। बुधवार को हाईकोर्ट की डिविजन बेंच के जस्टिस एएम शफीक और जस्टिस पी सोमराजन ने यह फैसला दिया है। उन्होंने यह बात मानी की इसकी वजह से दुर्घटनाएं होती हैं और लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। हाईकोर्ट कोच्चि के रहने वाले एमजे संतोष की तरफ से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
डिविजनल बेंच ने कहा कि वर्तमान कानून में किसी शख्स को मोबाइल फोन पर बात करते हुए पकड़ना अपराध नहीं है। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से कहा कि याचिकाकर्ता संतोष पिछले साल 26 अप्रैल की शाम को गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बात भी कर रहा था। उसे तभी पकड़ा गया था। सिंगल बेंच के जस्टिस सतीशचंद्रन ने पाया था कि गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करना केरला पुलिस की धारा 184 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 118 (ई) में अपराध है। हालांकि कोर्ट ने बिना जुर्माने के मामले का निपटारा कर दिया था।
बताते चले कि आज हे कोई वाहन चालक है जो कभी न कभी वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता है| जिससे लोग सड़क दुर्घटना का शिकार बन रहे हैं| उसी बिच कोर्ट का यह फैसला कही लोगों को और लापरवाह न बना दें| क्यूंकि अभी भी कई वाहन चालक पुलिस कर्मी व चलान कटने के डर से मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते|
कोर्ट ने पुलिस से कहा कि वह कार्रवाई तभी कर सकता है जब किसी शख्स द्वारा फोन पर बात करने से लोगों की जिंदगी पर खतरा मंडराता हो। यह भी पाया गया कि राज्य पुलिस के कानून में अभी तक ड्राइवर्स को फोन पर बात करने से रोकने के लिए कोई कानून नहीं बना है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई केस दर्ज करना है तो उसके लिए पहले विधानसभा द्वारा वर्तमान कानून में संशोधन करना होगा। हाईकोर्ट ने जस्टिस सतीशचंद्रन के आदेश को सही माना।

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